ग़ज़ल
इश्क पे कभी दिल से, ऐतबार मत करना।
प्यार है महज धोका, प्यार व्यार मत करना।
देखने में हो चाहे, वो तो चाँद जैसा भी।
भूल के भी उससे तुम, आँखें चार मत करना।
आंसुओं से भीगा हो, चाहे उसका वो दामन।
उस हसीन कातिल का, ऐतबार मत करना।
उनसे हमने पूछा तो, हँस के वो ये कहते हैं।
रात गई बात गई, अब इंतजार मत करना।
भूल तुम से हो जाए, प्यार करने की ऐ ‘‘दिल‘‘
एक बार कर लो तो, बार बार मत करना।
_दिलशेर "दिल"
इश्क पे कभी दिल से, ऐतबार मत करना।
प्यार है महज धोका, प्यार व्यार मत करना।
देखने में हो चाहे, वो तो चाँद जैसा भी।
भूल के भी उससे तुम, आँखें चार मत करना।
आंसुओं से भीगा हो, चाहे उसका वो दामन।
उस हसीन कातिल का, ऐतबार मत करना।
उनसे हमने पूछा तो, हँस के वो ये कहते हैं।
रात गई बात गई, अब इंतजार मत करना।
भूल तुम से हो जाए, प्यार करने की ऐ ‘‘दिल‘‘
एक बार कर लो तो, बार बार मत करना।
_दिलशेर "दिल"

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