10 ग़ज़लें
दिल की दहलीज़ पे चुपचाप से आने वाले।
कौन है तू ये बता नींद चुराने वाले।।
मेरे खिलते हुए गुलशन को जलाने वाले।
क्या मिला तुझको बहारों को मिटाने वाले।।
किसी दुश्मन पे मैं तोहमत भी लगाऊँ कैसे।
मेरे अहबाब ही हैं मुझको मिटाने वाले।।
दे गए आंसू बहाकर वो तसल्ली दिल को।
लूट के घर को मिरे आग लगाने वाले।।
नाखुदा कौन करेगा भला अब तुझ पे यकीं।
लबे साहिल पे मेरी कश्ती डुबाने वाले।।
लूटते हैं यहां रहजन ही तो रहबर बनकर।
अब नहीं मिलते यहाँ राह दिखाने वाले।।
तेरे क़दमों पे ज़माने की भी खुशियाँ हो निसार।
मेरी तुरबत को यूँ फूलों से सजाने वाले।।
यूँ सितमगर तो कई देखे हैं अक्सर लेकिन।
"दिल" को मिलते ही नहीं दिल से लगाने वाले।।
दिलशेर "दिल"
ग़ज़ल
नफ़रत के पुजारी न तरफदार हैं हम सब।
हाँ उन्स-ओ-मुहब्बत के परस्तार हैं हम सब।
दर-दर का भिखारी न समझना कभी हमको,
फितरत से हमेशा ही से खुद्दार हैं हम सब।
बिखरे हुए हैं फिर भी समझना नहीं कमज़ोर,
दुश्मन के लिए आहनी दीवार हैं हम सब।
तुम तन्हा नहीं हो फ़क़त इस जुर्म में शामिल,
ज़हरीली फ़िज़ाओं के गुनहगार हैं हम सब।
उंगली पे नचाता है ज़माने को वो ए "दिल",
क़ादिर है हर इक शै पे वो, लाचार हैं हम सब।
दिलशेर "दिल"
ग़ज़ल
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*दिल की जागीर*
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हुस्ने तदबीर ही है कुछ ऐसी।
दिल की जागीर ही है कुछ ऐसी।
बस गई है वो जेहनो दिल में मेरे.
उस की तसवीर ही है कुछ ऐसी।
ख्वाब करता भी मैं बयाँ कैसे,
क्यूँकि ताबीर ही है कुछ ऐसी।
क्यूँ है मशहूर ताज दुनिया में,
उसकी तामीर ही है कुछ ऐसी।
जायका तो खराब होगा ही,
सच की तासीर ही है कुछ ऐसी।
जो भी चाहा वही मिला ऐ 'दिल'
अपनी तकदीर ही है कुछ ऐसी।
ग़ज़ल
ज़िन्दगी सच है तेरा कोई ऐतबार नहीं।
तेरी चाहत में मगर कौन गिरफ़्तार नहीं।
सरफ़रोशी का वो जज़्बा है कहाँ अब यारो,
जान देने को वतन पे कोई तैयार नहीं।
एक बेजान सी मूरत ही समझिये उसको,
जज़्ब-ए-इश्क़ से इंसान जो सरशार नहीं।
अज़्मे मोहकम लिए लड़ता हूँ हर एक मुश्किल से,
गर्दिशे -वक़्त से डरना मेरा किरदार नहीं।
मेरे अफ़कारो ख़यालात तो अनमोल हैं 'दिल',
उनकी कीमत किसी ज़रदार का दीनार नहीं।
दिलशेर "दिल" -
ग़ज़ल
हम तुम्हे टूट के चाहें तो ग़ज़ल हो जाये।
तुमको अपना जो बनायें तो ग़ज़ल हो जाये।
हमने जो साथ गुज़ारे थे हसीं पल कितने,
बस वही याद दिलाऐं तो ग़ज़ल हो जाये।
तुमसे बिछड़े तो हमें घेर लिया है ग़म ने,
ग़म की परछाई हटायें तो ग़ज़ल हो जाये।
जाने किस बात से वो मुझ से ख़फ़ा है इतने,
हम उन्हें आज मनायें तो ग़ज़ल हो जाये।
:- *दिलशेर "दिल"*
ग़ज़ल
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ग़ज़ल कैसे कहें और, किस तरह से, हम ग़ज़ल लिक्खें।
तुम्हारे सुर्ख़ होंटों, को न जब तक, हम कँवल लिक्खें।
तुम्हारे होंट के, नीचे ही इक, क़ातिल सा जो तिल है,
कि दिल करता है, बस उस पर ही अपनी, हर ग़ज़ल लिक्खें।
तुम्हारे खूबसूरत मरमरी गोरे बदन को हम,
तराशा है जिसे, मन से वही बस, इक महल लिक्खें।
तुम्हारी इस मुहब्बत की हसीं बारिश को ए जानां,
बड़ी शिद्दत से मांगी थी दुआ उसका ही फल लिक्खें।
*:- दिलशेर "दिल"*
दतिया (म.प्र.)
*ग़ज़ल*
रात के मुसाफ़िर हैं, सुब्हा चले जायेंगे।
प्यार से पुकारोगे, फिर से लौट आएंगे।।
सुब्हा फिर समन्दर है, कश्तियाँ है, पानी है।
रात भर जगाया तो, नाव क्या चलाएंगे।।
साथ छोड़ जायें जब, अपने और पराये भी,
कोई जब न होगा तब, काम हम ही आयेंगे।।
उनकी चाहतों में हम इस तरह से डूबे हैं,
होश ही नहीं है जब, हाल क्या सुनाएंगे।।
कितनी अब तसल्ली है, कितना है सुकूने दिल,
जब से ये ख़बर आई, सुब्हा को वो आयेंगे।।
जान भी लुटा दें हम, उनके इक इशारे पर,
प्यार इतना करते हैं, क्या वो मान जायेंगे।
आज चाहे ठुकरा दें, तोड़ दें हमारा दिल,
एक दिन मगर हम ही, डोली ले के जायेंगे।
घोड़ियों पे सज-धज के हम न आयेंगे हरगिज़,
हम तो शहर वाले हैं, गाड़ियों से आयेंगे।
उनको जब से देखा है, होश में नहीं है दिल'
उनकी गहरी आँखों में हम भी डूब जायेंगे।
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ग़ज़ल
हमको एक मौक़ा दो, हम तुम्हे बता देंगे।
प्यार कैसे करते हैं, हम तुम्हे सिखा देंगे।।
अपने सारे ग़म दे दो, मेरी हर खुशी ले लो,
हँस के तुम जो देखोगे, हम भी मुस्कुरा देंगे।।
याद कितना करते हैं, 'तुमको' ये नहीं पूछो।
आ के सीने से लग जा, धड़कनें सुना देंगे।।
सोने ही नहीं देती, तेरी याद रातों में,
तेरी बाहों में एक दिन, दुनिया को भुला देंगे।।
देखिये फ़क़त इतना, तुमसे चाहता है दिल"
इश्क हमसे तुम करना, जान हम लुटा देंगे।।
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*ग़ज़ल*
मेरे दिल की दुनिया लुटाने से पहले।
चला आये कोई, बुलाने से पहले।
ज़मीं ओढ़ लूंगा, अगर वो न आया,
वो आ जाये हस्ती मिटाने से पहले।
न देखा, न जाना, न उससे मिला हूँ,
वो मिल जाये खुद को भुलाने से पहले।
जो हो सामने तो ग़ज़ल मैं लिखूंगा,
ना जाये ग़ज़ल वो सुनाने से पहले।
कई ख़त लिखे हैं तसव्वुर में 'दिल' के,
वो आ जाये हर ख़त जलाने से पहले।
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*ग़ज़ल*
इश्क पे कभी दिल से, ऐतबार मत करना।
प्यार है महज़ धोका, प्यार व्यार मत करना।
देखने में हो चाहे, वो तो चाँद जैसा भी।
भूल के भी उससे तुम, आँखें चार मत करना।
आंसुओं से भीगा हो, चाहे उसका वो दामन।
उस हसीन क़ातिल का, ऐतबार मत करना।
उनसे हमने पूछा तो, हँस के वो ये कहते हैं।
रात गई बात गई, अब इंतजार मत करना।
भूल तुम से हो जाए, प्यार करने की ऐ"दिल"
एक बार कर लो तो, बार बार मत करना।
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-: *दिलशेर "दिल"*
पूरा पता :-
*दिलशेर 'दिल'*
गोंडा मोहल्ला, नजियाई बाजार,
दतिया (म.प्र.)475661
मोबाइल : 7619004111
Friday, November 20, 2020
चंद ग़ज़लें (10 ग़ज़लें)
गीत
गीत
*गीत सुहाना लिख आयें*
आओ हम भी दीवारों पर।
गीत सुहाना लिख आयें।
दादी नानी के जैसा हम।
एक जमाना लिख आयें।।
लम्बे-लम्बे किस्से होंगे,
छोटी-छोटी रातों में।
बच्चे सारे खो जायेंगे,
परियों वाली बातों में।
कुछ नया सा कहें हम भी,
कुछ पुराना लिख आयें।
आओ हम भी दीवारों पर,
गीत सुहाना लिख आयें।!
आओ तुमको बतलायें हम,
बचपन वाली बातों को।
कागज वाली नाव थी जिनमें,
रिमझिम उन बरसातों को।
टूटी-फूटी बोली वाला,
एक खजाना लिख आयें।
आओ हम भी दीवारों पर,
गीत सुहाना लिख आयें।!
टेढ़ी-मेढ़ी पगडण्डी थी,
और किनारा नदियों का।
पहले इनसे रिश्ता था अब,
हुआ पुराना सदियों का।
छोड़ो अंग्रेजी "ग्रांड पा"
दादा-नाना लिख आयें।
आओ हम भी दीवारों पर,
गीत सुहाना लिख आयें।!
:- *दिलशेर 'दिल',*
दतिया (म.प्र.)
ग़ज़ल (नातिया कलाम)
कहाँ तक झूंट बोलोगे हक़ीक़त को छुपाने में।
तुम्हे मिलता है क्या बोलो हमें यूँ वरगलाने में।
हमारी मौत भी उनके लिए है ताश का इक्का,
वो माहिर हैं यहाँ पूरे, हमें हरदम सताने में।
बयाँ करते रहे मेरा सफ़र ये पाँव के छाले,
कटी है उम्र ये मेरी, नए रस्ते बनाने में।
मिरी ग़ुरबत कि मुझको काम कोई मिल नहीं पाया,
न दफ़्तर में, न मिल में और, न ही कारखाने में।
हुई मुद्दत कि आँखों से कोई आँसू नहीं टपका,
छलक आये हैं इनमे अश्क यूँ ढांढस बंधाने में।
मैं शायर हूँ मेरा तो काम ही ग़ज़लें सुनाना है,
मगर "दिल" को भी तो अब चैन आये कुछ सुनाने में।
दिलशेर "दिल"