Friday, November 20, 2020

गीत

 गीत

*गीत सुहाना लिख आयें*

आओ हम भी दीवारों पर।
गीत सुहाना लिख आयें।
दादी नानी के जैसा हम।
एक जमाना लिख आयें।।

लम्बे-लम्बे किस्से होंगे,
छोटी-छोटी रातों में।
बच्चे सारे खो जायेंगे,
परियों वाली बातों में।

कुछ नया सा कहें हम भी,
कुछ पुराना लिख आयें।
आओ हम भी दीवारों पर,
गीत सुहाना लिख आयें।!

आओ तुमको बतलायें हम,
बचपन वाली बातों को।
कागज वाली नाव थी जिनमें,
रिमझिम उन बरसातों को।

टूटी-फूटी बोली वाला,
एक खजाना लिख आयें।
आओ हम भी दीवारों पर,
गीत सुहाना लिख आयें।!


टेढ़ी-मेढ़ी पगडण्डी थी,
और किनारा नदियों का।
पहले इनसे रिश्ता था अब,
हुआ पुराना सदियों का।

छोड़ो अंग्रेजी "ग्रांड पा"
दादा-नाना लिख आयें।
आओ हम भी दीवारों पर,
गीत सुहाना लिख आयें।!

:- *दिलशेर 'दिल',*
     दतिया (म.प्र.)

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